जय जय त्रिपुरेश्री....
#TripuraSundari जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता चाहिए तो देवी त्रिपुरा सुंदरी को मनाइए!
दैनिक नवशोभ (व्हाट्सएप- 6367472963)
जी हां, यदि जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता चाहिए तो देवी त्रिपुरा सुंदरी को मनाइए!
राजस्थान के वागड़ क्षेत्र के बांसवाड़ा जिले में प्राचीन ग्राम तलवाड़ा के पास देवी त्रिपुरा सुंदरी का भव्य प्राचीन दरबार है, जहां देश-प्रदेश के कई बड़े-बड़े राजनेता सियासत में सफलता और सत्ता-सुख की मनोकामनाएं लेकर आते रहे हैं और देवी त्रिपुरा सुंदरी के आशीर्वाद से कामयाबी पाते रहे हैं.
राजतंत्र में युद्ध में सफलता हेतु प्राचीन समय में राजा-महाराजा देवी त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में आते थे तो लोकतंत्र में चुनाव में जीत के लिए राजनेता देवी त्रिपुरा सुंदरी की शरण में आते हैं.
कभी वागड़ के घोर जंगल में स्थित देवी त्रिपुरा सुंदरी का दरबार तेजी से देश-प्रदेश के राजनेताओं के आकर्षण का प्रमुख केन्द्र बनता जा रहा है... देवी के दरबार में अनेक राजनेता, राजनीति में कामयाबी की प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष मनोकामनाएं लेकर आते रहे हैं और देवी के आशीर्वाद से कामयाबी पाते रहे हैं.
राजस्थान के भूतपूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी देवी त्रिपुरा सुंदरी के प्रमुख भक्त थे तथा वे ताउम्र देवी के दरबार में आते रहे तो देवी त्रिपुरा सुंदरी के दरबार में साठ वर्षों से अधिक ताउम्र निरंतर नवरात्रि में साधना करनेवाले देवलोकवासी पं. लक्ष्मीनारायण वासुदेव द्विवेदी ने देश के अनेक प्रमुख व्यक्तियों को देवी के आशीर्वाद से साक्षात्कार करवाया. श्रीमोहनखेड़ा तीर्थ के प्रमुख संत रवीन्द्र विजय महाराज और ऋषभ विजय महाराज की प्रेरणा से भी यहां कई प्रमुख श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की और देवी का आशीर्वाद प्राप्त किया. राजस्थान की मुख्यमंत्री रही वसुंधरा राजे भी देवी त्रिपुरा सुंदरी की परम भक्त हैं.
राजनीति में कर्म का महत्व तो है ही, लेकिन... भाग्य के समर्थन के बगैर सियासत में सफलता दूर होती जाती है, इसीलिए भाग्य संवारने के लिए देवी त्रिपुरा सुंदरी की आराधना की जाती है.
जब जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह अकारक हो, गोचरवश चुनाव के समय अनुकूल नहीं हो, दशा-अन्तरदशा में प्रतिकूल हो तो चुनाव के दौरान प्रसिद्ध और प्रभावी लोगों के विरोध का सामना करना पड़ता है, ऐसे ही... चन्द्र प्रतिकूल होने पर चुनाव आर्थिक/मानसिक तनाव देता है, मंगल अनुकूल नहीं होने पर भाई-बंधु चुनाव में साथ नहीं देते हैं, बुध प्रतिकूल होने पर व्यवसायी वर्ग विरोध में रहते हैं, गुरु अनुकूल नहीं होने पर विद्वान एवं सम्माननीय व्यक्ति खिलाफ होते हैं, शुक्र प्रतिकूल होने पर महिलाओं का समर्थन नहीं मिलता है तो शनि प्रतिकूल होने पर आम मतदाता का सहयोग नहीं मिलता है, ऐसी स्थिति में सुधार के लिए... विभिन्न ग्रहों की शांति के लिए देवी त्रिपुरा सुंदरी के विविध स्वरूपों की पूजा की जाती है.
चुनाव के समय राहु प्रतिकूल होने पर दूसरे धर्म के मतदाताओं का पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता है तथा गुप्त शत्रुओं का भय रहता है तो केतु प्रतिकूल होने पर जीत की संभावनाओं पर ग्रहण लग जाता है, इन दोनों ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव से सुरक्षा के लिए देवी के दो विभिन्न स्वरूपों की आराधना की जाती है.
किसी भी चुनाव में तीन स्थितियां होती है... अनुकूल, सम और प्रतिकूल, देवी त्रिपुरा सुंदरी की आराधना से जहां अनुकूल समय में कामयाबी का परचम लहराता है तो सम-समय में सफलता का मार्ग नजर आने लगता है और प्रतिकूल समय में देवी पूजा, सुरक्षा-कवच प्रदान करती हैं.
राजनीति में कामयाबी के लिए देवी त्रिपुरा सुंदरी की दो तरह से पूजा होती है, एक... प्रत्यक्ष पूजा, जिसमें राजनेता देवी के दरबार में उपस्थित हो कर पूजा-अर्चना, यज्ञ-हवन करते हैं, दूसरी... संकल्प पूजा, जिसमें राजनेता कहीं पर भी संकल्प लेकर अपने लिए पूजा करवाते हैं तथा सफल होने के पश्चात दर्शनार्थ आते हैं.
बीसवीं सदी के सातवें दशक की शुरुआत में स्वर्गीय करण सिंह कोठारी, पं. लक्ष्मीनारायण द्विवेदी, पं. नटवरलाल पाठक आदि बांसवाड़ा पंचाल समाज के श्रद्धालुओं के साथ यहां नियमितरूप से आते रहे तो स्वर्गीय कोठारी ने उस दौरान मंदिर परिसर में स्थित कुएं, सीढिय़ों आदि के मरम्मत के कार्य भी करवाए. तब लोहे का मुख्यद्वार बंद रहता था तथा मंदिर के उत्तरी भाग में कच्ची-पक्की सीढिय़ों से ही श्रद्धालुओं का आनाजाना होता था. त्रिपुरा सुंदरी के आसपास के गांवों के विभिन्न समाजों के श्रद्धालुओं के नियमित पारिवारिक/सामाजिक कार्य भी यहां संपन्न होते थे तो नवरात्रि में तलवाड़ा, छींच आदि गांवों के ब्राह्मण यहां पूजा-अर्चना करते रहे हैं.
राजस्थान के मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी की भक्ति-प्रेरणा से ही देवी के दरबार को भव्य स्वरूप प्रदान करने की शुरूआत हुई जो आज भी जारी है. भारतीय जनता पार्टी की सरकार में मंत्री रहे भवानी जोशी ने न केवल माता के दरबार को भव्य स्वरूप प्रदान करने में अपना प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष योगदान दिया बल्कि अनेक प्रमुख नेताओं को प्रेरित भी किया.
देश के कई बड़े राजनेता, साधुसंत आदि यहां नियमितरूप से दर्शनार्थ आते रहे हैं. राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी देवी त्रिपुरा की परमभक्त हैं तथा इस वक्त उनकी प्रेरणा से भी देवी का दरबार लगातार भव्य स्वरूप प्राप्त कर रहा है.
तलवाड़ा के पं. हरिकृष्ण पंड्या परिवार के पं. निकुंज पंड्या, पं. दिव्यभारत पंड्या, पं. भुवन पंड्या भी देवी त्रिपुरा सुंदरी की पूजा-साधना की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं तो पं. लक्ष्मीनारायण द्विवेदी के पुत्र ऑल इंडिया ब्राह्मण फेडरेशन के पदाधिकारी निरंजन द्विवेदी भी समय-समय पर देश के प्रमुख व्यक्तियों को जीवन में सफलता के लिए देवी के दरबार में पूजा-दर्शन के लिए प्रेरित करते रहे हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी के भानजे दूरदर्शन के वरिष्ठ अधिकारी रहे स्वर्गीय शैलेन्द्र उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय नंदकिशोर पटेल, वरिष्ठ लेखक भंवरलाल पंचाल, राजस्थान जनसंपर्क सेवा के अधिकारी दीपकदत्त आचार्य, राजस्थान जनसंपर्क सेवा के अधिकारी रहे गोपेन्द्र भट्ट, राजस्थान जनसंपर्क सेवा के अधिकारी रहे स्वर्गीय नागेन्द्र डिंडोर, हार्दिक गणेश गरबा फेम हार्दिक द्विवेदी, पत्रकार भुवनेश द्विवेदी, चंद्र त्रिवेदी आदि ने देवी त्रिपुरा सुंदरी की महिमा से देश-दुनिया को अवगत करवाया है, तो वागड़ का पंचाल समाज देवी के दरबार को भव्य स्वरूप प्रदान करने में समर्पित भाव से निरंतर सक्रिय है!

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